छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों का भौगोलिक अध्ययन एवं महत्त्व
डॉ. कुबेर सिंह गुरुपंच
प्राध्यापक एवं अधिष्ठाता, भारती विश्वविद्यालय, दुर्ग छ.ग.
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ABSTRACT:
प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों का भौगोलिक अध्ययन एवं महत्त्व है द्य छत्तीसगढ़ में शासन द्वारा विभिन्न पर्यटन स्थलों को चिन्हान्तित किया गया है जहाँ देशी एवं विदेशी पर्यटक आते है इससे राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है अतः छत्तीसगढ़ में पर्यटन की अपार संभवनाएँ है। शोध एवं अनुसंधान की दृष्टिकोण से वैज्ञानिक पहलुओं का ध्यान रखते हुए मानचित्रों का उपयोग कर पर्यटन के अनेक पहलुओं का अध्ययन आवष्यक है। पर्यटन में भाषाओं से संबंधित तत्वों का अध्ययन, भौगोलिक तत्वों को ध्यान में रखकर किया जाता है। किसी स्थान और उनके निवासियों की संस्कृति, सुरूचि, परम्परा, जलवायु, पर्यावरण और विकास के स्वरूप विस्तृत ज्ञान प्राप्त करने और उसके विकास में सहयोग करने वाले पर्यटन को पर्यटन भूगोल के अंतर्गत अध्ययन करते है। छत्तीसगढ़ के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल का गठन 18 जनवरी 2002 को किया गया। छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों (ब्ीींजजपेहंती ाम च्ंतलंजंद ैजींस) का जिलेवार विवरण नीचे दिया गया है।
KEYWORDS: पर्यटन, पर्यावरण, मानचित्र उपकरण, मान्यताए आदि।
INTRODUCTION:
अध्ययन के उद्देष्य -
1. छ.ग. के पर्यटन स्थलों का अध्ययन करना।
2. पर्यटन स्थलों की समस्याओं की जानकारी प्राप्त करना।
3. पर्यटन स्थलों की विकास की संभावनाओं को पता करना।
4. पर्यटन में परिवहन व्यवस्था एवं अन्य पर्यावरणीय महत्व को जानना।
विधितंत्र
प्रस्तुत शोधपत्र उद्देष्य के अनुरूप प्राथमिक एवं द्वितीयक स्रोतों से जानकारी एकत्रित किया गया है। निरीक्षण विधि द्वारा भी स्रोतो को वास्तविकता से परिचित कराया गया है।
महत्व -
पर्यावरणीय तत्वों में स्थानीय जैव सम्पदा आधारित विभिन्नता तथा परिस्थितिक तंत्र पर्यटकों को आकर्षित करते है। स्थानीय पेड़पौधे, जीव जन्तु आदि महत्वपूर्ण है। स्थानीय स्थलकृति, नदी, घाटिया। सागर, स्वास्थ्य वर्धक पहाड़ी जलवायु वाले क्षेत्र पर्यटकों को आकर्षित करते है। मौसमी कारण जैसे तापमान, पवन, आर्द्रता, वर्षा पर्यटन से सीधे संबंध रखते है। इसी कारण सभी प्रमुख पर्यटन स्थलों की जानकारी वेबसाईट पर दी जाती है। मौसम के कारण सर्दियों में पर्यटकों की संख्या अधिक और गर्मियों में कम होती हैं एक सुव्यवस्थित परिवहन व्यवस्था भी पर्यटन क्षेत्र की रीढ़ की हड्डी कही जा सकती है। पर्यटक अनेक प्रकार की भौगोलिक मानचित्रों, उपकरणों व पुस्तकों का प्रयोग करते है। मानचित्रावली में पर्यटन पुस्तिका, पर्यटन केन्द्रों या विभिन्न स्थानों के पर्यटन विभागों के विवरण प्राप्त कर दर्षनीय स्थलों के चित्रों की सहायता से नयी नयी जानकारी प्राप्त करता है।
पर्यटन में बाधक कारण -
पर्यटन को बढ़ाने और विकसित करने में, विभिन्न भौगोलिक तत्वों का बहुत योगदान होता है साथ ही कुछ भौगोलिक विनाषकारी घटनाएँ पर्यटन उद्योग को नुकसान पहुंचाता है। जिसमें ज्वालामुखी, भूकम्प, सुनामी, भूमंडलीय ऊष्मीकरण, वन्य-जीव का आवासीय क्षेत्र में आगमन आदि महत्वपूर्ण है।
1. जशपुर जिले के पर्यटन स्थल जशपुर नगर -
रानीदाह प्रपात, दमेरा प्रपात, इंदिरा घाट, पत्थलगांव-किलकिला घाटियां, नंदन घाटियां झारियां घाटियां स्थित है। कुनकुरी-महागिरजाघर (एशिया का दूसरा बड़ा चर्च) यह जशुपर पाट प्रदेश में स्थित है। बगीचा-नाशपाती, लीची, आम के बगीचों खुड़िया रानी की गुफा एवं प्रपात। सन्ना-यह एक प्राकृतिक स्थल है। सोग्रा अघोर आश्रम-भगवान अघोरेश्वर का आश्रम, खुड़ियारानी गुफा-यह बगीचा क्षेत्र में स्थित है जहां खुड़ियारानी का मंदिर है।
2. बलरामपुर जिले के पर्यटन स्थल –
डीपाडीह-कन्हार नदी के तट पर स्थित पुरातात्विक स्थल है। यहां सामत सरना मंदिर समूह, रानी पोखरा मंदिर, बोरजाटीला मंदिर इत्यादि स्थित है। अर्जुनगढ़-यहां प्राचीनतम किल्के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। इस पहाड़ी पर घीरियालता गुफा है। तातापानी-तातापानी में गर्म पानी का फौव्वारा है। तातापानी में 130 मेगावाट तक विद्युत उत्पादन किया जाता है। यह प्रदेश का एकमात्र जियो थर्मल पावर प्रोजेक्ट स्थापित है।
3. सरगुजा जिले के पर्यटन स्थल-
मैनपाट-छत्तीसगढ़ का शिमला। यहां से मांड नदी का उद्गम हुआ है। बौद्ध मंदिर-यह मंदिर मैनपाट में स्थित है। इस मंदिर का निर्माण परम्परागत बौद्ध वास्तुकला के अनुसार किया गया है। टाईगर प्वाइंट-मैनपाट के पूर्वी भाग से महादेव मुड़ा नदी बहती है जिसमें टाइगर प्वाइंट जलप्रपात निर्मित है। पहले यहाँ टाइगर घूमा करता था इसी कारण इसका नाम टाईगर प्वांइट पड़ा। मछली (फिश) प्वाइंट जलप्रपात-पहाड़ी नाला पर निर्मित जलप्रपात है जहां पर बहुत अधिक मछलियां मिलती है। इसी आधार पर मछली प्वाइंट कहते हैं। परपटिया-मैनपाट के पश्चिमी भाग से बंदरकोट की दुर्गम ऊंची पहाड़ी है। प्राकृतिक गुफा रकामाड़ा, जनजातियों के आस्था का प्रतीक दूल्हा-दुल्हन पर्वत बनरई बांध, श्याम धनुघुट्टा के बांध। मेहता प्वाइंट-यहां पर झरने व जलप्रपात हैं जो सरगुजा और रायगढ़ की सीमा बनाती है।
4. सूरजपुर जिले के पर्यटन स्थल –
सारासोर-गंगाधर मंदिर जलधारा, सूरजपुर - पाताल/काल भैरव का मंदिर, डुगडुगी पत्थर-भैयाथान तहसील के समीप जामड़ी ग्राम के पहाड़ी के शीर्ष पर स्थित पत्थर है जिसे हिलाने पर डुगडुगी की आवाज आती है, इसलिए इस पत्थर का नाम डुगडुगी रखा गया है।, सीतालेखनी की पहाड़ी-प्रदेश का प्रथम पक्षी अभ्यारण्य प्रस्तावित। अन्य पर्यटन स्थल-कुंदरुघाघ जलप्रपात, जुबा जलप्रपात, बिलद्वार।
5. कोरिया जिले के पर्यटन स्थल –
कटाडोल-यह एक पुरातात्विक स्थल है, जहां अशोककालीन मूर्तियां प्राप्त हुई है। यह बनास एवं गोपद नदी के तट पर स्थित स्थल है। हरचौंका-देवी-देवताओं की प्राचीन मंदिर मुहावी नदी के तट पर स्थित है। बैकुंठपुर-यहां छिपछिपी देवी का मंदिर स्थित है। बैकुंठपुर कर्क रेखा के समीप स्थित है। यह कोरिया का जिला मुख्यालय है। सीतामढ़ी हरचौंका-यह पवई नदी के तट पर स्थित पुरातात्विक स्थल है जहां भग्नावस्था में अनेक मंदिरें प्राप्त हुई हैं। सीतामढ़ी गुफा-भरतपुर तहसील के घाघरा ग्राम में स्थित प्राकृतिक गुफा है।
6. धमतरी जिले के पर्यटन स्थल –
धमतरी-बिलाई माता का मंदिर, सिहावा पर्वत-यहां श्रृंगी ऋषि मेला लगता है। फरसिया नामक स्थान से महानदी का उद्गम होता है। कर्णेश्वर महादेव का मंदिर-इस मंदिर के निकट एक जलकुंड स्थित है और यहां एक मान्यता चली आ रही है कि इस जलकुंड में स्नान करने से कुष्ठ रोग से मुक्ति मिल जाती है। यहां पर प्रतिवर्ष कर्णेश्वर मेला का आयोजन होता है। सीता नदी वन्यजीव अभ्यारण्य, गंगरेल बाँध (रविशंकर जलाशय), अंगरमोती माता का मंदिर, डोंगेश्वरघाट (देवपुर)
7. गरियाबंद जिले के पर्यटन स्थल –
राजिम-यहाँ महानदी, पैरी व सोंदूर नदी का संगम है। राजिम को छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहा जाता है। छत्तीसगढ़ विधानसभा में राजिम में कुंभ मेला हेतु 2006 में विधेयक पारित किया गया। प्रतिवर्ष माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक यहां मेले का आयोजन किया जाता है जिसे कुंभ मेले की संज्ञा दी जाती थी किन्तु वर्तमान में 2019 से इसे पुन्नी मेला के नाम से जानी जाती है। राजीव लोचन मंदिर - यह पंचायत शैली में निर्मित वैष्णव धर्म से संबंधित है।
8. महासमुंद जिले के पर्यटन स्थल –
सिरपुर-यह महानदी के तट पर स्थित है। यहां पर बौद्ध हिन्दू और जैन मंदिरों और मठों के स्मारक है। यह धार्मिक, ऐतिहासिक, पुरातात्विक स्थल है, जिसे प्राचीन काल में श्रीपुर एवं चित्रांगदापुर के नाम से भी जाना जाता है। जिसे पुरीय वंशीय एवं पान्डुवंशीय शासकों की राजधानी होने का श्रेय है। लक्ष्मण मंदिर-इसके गर्भगृह में-भगवान विष्णु की प्रतिमा है। निर्माणकर्ता-पाण्डुवंशीय शासक हर्ष गुप्त की पत्नी वासटादेवी ने अपने पति के स्मृति में निर्माण कार्य प्रारंभ किया था। महाशिवगुप्त बालार्जुन के काल में निर्माण कार्य पूर्ण हुआ। यह मंदिर पूर्ण लाल ईंटों से बना है, जिसमें देवी-देवताओं, पुष्प एवं पशुओं का कलात्मक चित्रांकन किया गया है। स्वास्तिक बौद्ध विहार-स्वास्तिक विहार बौद्ध धर्म से संबंधित है।
9. बलौदाबाजार जिले के पर्यटन स्थल –
गिरौदपुरी - गिरौदपुरी संत गुरू घासीदास जी की जन्मस्थली। गिरौदपुरी में स्थित जैतखाम की ऊँचाई 77 मीटर है जिसकी तुलना कुतुबमीनार से की जाती है। छाता पहाड़ - यह बलौदाबाजार जिले में स्थित है। तेलासीबाड़ा-यह सतनाम पंथ से संबंधित स्थल है जो पलारी तहसील के अंतर्गत आता है। दामाखेड़ा-समाधि मंदिर स्थित है। यह कबीर पंथियों का प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। प्रदेश में सर्वप्रथम कबीर पंथियों के 12 वें वंशगुरू उग्रनाम साहब के द्वारा यहां पर कबीर मठ की स्थापना वर्ष 1903 में की गई।
10. रायपुर जिले के पर्यटन स्थल –
रायपुर - छत्तीसगढ़ राज्य पशु विकास अभिकरण की स्थापना - जून 2001 में रायपुर में की गई है। यह खारून नदी के तट पर स्थित है। कल्चुरी शासक रामचन्द्र देवराय ने अपने पुत्र ब्रम्हदेव राय के नाम पर बसाया था। 1818-एगेन्यू द्वारा रतनपुर से रायपुर राजधानी स्थानांतरित। छत्तीसगढ़ का सबसे प्राचीन नगर निगम रायपुर 1967 में बनाया गया। दूधाधारी मठ-निर्माणकर्ता-बलभद्र दास, हाटकेश्वर महादेव मंदिर-स्थान-रायपुर, श्रीधाम अघोरी मठ-इकलौता मठ जिसका पूरा गुंबद श्रीयंत्र से निर्मित है।
11. गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के पर्यटन स्थल –
जलेश्वर धाम-यहां प्राचीन शिवमंदिर स्थित है। लक्ष्मण धारा, झोझा जलप्रपात, कबीर चबूतरा
12. जांजगीर-चांपा जिले के पर्यटन स्थल –
जांजगीर-12 वीं शताब्दी में कल्चुरी शासक जाजल्यदेव प्रथम द्वारा स्वयं के नाम पर जाजल्यपुर नामक शहर बसाया गया। जिसे वर्तमान जांजगीर के रूप में चिन्हांकित किया गया है, आज भी जाजल्यदेव की स्मृति में प्रतिवर्ष जाजल्य महोत्सव मनाया जाता है एवं साथ ही, विष्णु मंदिर का निर्माण कराया। विष्णु मंदिर-निर्माणकर्ता-जाजल्यदेव प्रथम। यह जांजगीर स्थित है। यह सप्तशैली से निर्मित है।इस मंदिर का शिखर अधूरा है। स्थानीय स्तर पर इसे नकटा मंदिर कहा जाता है। इसके समीप भीमा तालाब स्थित है। नहरिया बाबा मंदिर-नहरिया बाबा मंदिर जांजगीर में स्थित है। खरौद-इसे छत्तीसगढ़ का काशी का संज्ञा दी गई है। यहाँ 1. शबरी मंदिर, 2. लक्ष्मणेश्वर मंदिर स्थित है। गर्भगृह में शिवलिंग स्थित है। शिवरीनारायण - यह जांजगीर-चांपा जिले में स्थित है।
13. रायगढ़ जिले के पर्यटन स्थल –
पुजारीपाली (शशिनगर)-इसका निर्माण 7-8वीं शताब्दी में लाल ईंटों से निर्मित किया गया। यहां केंवटीन मंदिर (शिव का मंदिर है) स्थित है। सिंघनपुर की गुफा-यह चंवरढाल पहाड़ी पर स्थित शैलचित्र। यह पूर्व पाषाणकालीन स्थल, शैलचित्र के लिए चर्चित है। प्रदेश में खोजी गई सबसे पहली गुफा है। रामझरना-यह रामायणकालीन स्थल है। बोतल्दा गुफा-यह छत्तीसगढ़ की सबसे लम्बी गुफा है। कबरा पहाड़ का गुफा-यह मध्य पाषाणकालीन स्थल है। प्रदेश में सर्वाधिक शैल चित्र लाल रंग के सांभर, घड़ियाल की सीढ़ीनुमा शैल चित्र है। भैंसगढ़ी शैलाश्रय-प्रागैतिहासिक कालीन शैलचित्र युक्त गुफा।
14. कोरबा जिले के पर्यटन स्थल –
पाली का शिव मंदिर - इसका अन्य नाम प्रस्तर शिवमंदिर है। इसका निर्माण 9 वीं सदी में राजा विक्रमादित्य (बाणवंशी शासक) द्वारा किया गया था। लाफागढ़-यह दुर्गम पहाड़ की चोटी पर स्थित है। लाफागढ़ का किलाबंदी कार्य पृथ्वीदेव प्रथम के द्वारा किया गया था। इसमें प्रवेश हेतु तीन द्वार हैं - 1. मेनका द्वार, 2. हुंकार द्वार, 3. सिंह द्वार। ये मैकल श्रेणी के अंतर्गत आने वाली पहाड़ियां है। रत्नदेव प्रथम द्वारा निर्मित महिषासुर मर्दिनी मंदिर स्थित है। चौतुरगढ़-इसकी चोटी पर एक किला स्थित है जिसे चौतुरगढ़ का किला कहा जाता है। ब्रिटिश अधिकारी वैंगलर ने इसे दुर्गम व अभेद्य किला कहा है।
15. मुंगेली जिले के पर्यटन स्थल –
मदकू द्वीप - यह स्थल शिवनाथ एवं मनियारी नदी के संगम में स्थित है। राजीव गांधी जलाशय द्य खुड़िया जलाशय-राजीव गांधी जलाशय मनियारी नदी में खुड़िया ग्राम (लोरमी) के समीप स्थित है। शिवघाट स्थान मंदिर-यह मनियारी नदी के तट पर लोरमी में स्थित है। यहाँ 300 वर्ष प्राचीन शिवलिंग की प्रतिमा स्थित है। धूमनाथ/धूमेश्वर मंदिर-यह मंदिर सरगांव में स्थित है। इसके गर्भगृह में सिन्दूर पुती हुई मूर्ति स्थापित कर धूमेश्वरी देवी के नाम से इसकी पूजा की जाती है।
16. बिलासपुर जिले के पर्यटन स्थल –
बिलासपुर-बिलासपुर की स्थापना 14 वीं सदी में कल्चुरी शासक रत्नदेव द्वितीय के द्वारा हुआ। बिलासपुर जिले का नामकरण बिलासाबाई केंवटिन के नाम पर किया है। बिलासपुर छत्तीसगढ़ की न्यायधानी है। यह राजस्व मंडल का मुख्यालय है। 1861 में बिलासपुर एक जिला बना, 1956 में बिलासपुर को संभाग का दर्जा मिला, 1867 में बिलासपुर को नगर पालिका का दर्जा मिला एवं 1981 में बिलासपुर को नगर निगम बना। बिलासपुर को छत्तीसगढ़ का शिवाकाशी (माचिस उद्योग) कहा जाता है।
17. बालोद जिले के पर्यटन स्थल –
कुकुरदेऊर मंदिर-यह खपरी ग्राम में स्थित है। यह मंदिर भगवान शिव का मंदिर है। यह एक स्मृति स्मारक है, जिसे एक बंजारा नामक साहूकार ने अपने कुत्ते के मर जाने के कारण उसकी याद में बनवाया था। गंगा मईया मंदिर-यह ग्राम झलमला (बालोद) में स्थित है। बहादुर कलारिन के माची-यह ग्राम चिरंचारी में स्थित है। यह एक प्राचीन स्मारक है। कपिलेश्वर मंदिर-यह मंदिर बालोद में स्थित है।
18. बेमेतरा जिले के पर्यटन स्थल –
नवागढ़-प्राचीन खेड़ापति हनुमान मंदिर स्थित है। बुचीपुर-बुचीपुर में महामाया मंदिर स्थित है। संडी-सिद्धि माता मंदिर स्थित है। गिधवा पक्षी विहार - प्रदेश का प्रथम पक्षी अभ्यारण्य प्रस्तावित। केन्द्र संरक्षित स्मारक-1. सती स्तंभ, देवरबीजा, 2. सीतादेवी मंदिर, देवरबीजा।
19. दुर्ग जिले के पर्यटन स्थल –
भिलाई - देश की सबसे ऊँची भगवान चंद्रप्रभ की प्रतिमा। भिलाई को ज्ञान की राजधानी कहते हैं। मैत्री गार्डन (1972)-रूस तथा भारत की मित्रता के प्रतीक के रूप में स्थित है। देश का 20वां प्प्ज् नेवई, भिलाई में है। नगपुरा-अन्य नाम पारसनगर है। पार्श्वनाथ को समर्पित (जैन धर्म के 23 वें तीर्थंकर)। श्री महावीर प्राकृतिक एवं योग विज्ञान चिकित्सा महाविद्यालय है। देवबलौदा-प्राचीनतम शिव मंदिर स्थित है। धमधा-प्राचीन किला एवं मंदिर, बूढ़ा तालाब स्थित है। तरीघाट-तरीघाट खारून नदी के तट पर दुर्ग जिला में स्थित है। बानाबरद-यहां गुप्त शासकों के स्वर्ण सिक्के प्राप्त हुए। विष्णु मंदिर स्थित है। पापमोचन एक कुण्ड है जो स्नान से पाप मुक्त के लिए प्रसिद्ध है। केन्द्र संरक्षित स्मारक - 1. शिव मंदिर धमधा, 2. शिव मंदिर देवबलौदा
20. कबीरधाम जिले के पर्यटन स्थल –
भोरमदेव मंदिर-ग्राम छपरी के निकट चौरागांव, मड़वा महल-गर्भगृह में शिवलिंग स्थापित है। छेरकी महल-इस महल के गर्भगृह से बकरी गंध आती है। कवर्धा महल-कवर्धा के राजमहल को कवर्धा महल नाम दिया गया है। पचराही-यह एक पुरातात्विक स्थल है जो फणीनागवंश से संबंधित था। जलप्रपात-रानीदेहरा जलप्रपात, गोदगोदा जलप्रपात। जलाशय-सरोदा जलाशय, छिरपानी जलाशय, सुतियापाट जलाशय। अन्य पर्यटन स्थल-बकेला, सतखंडा महल, कामटी, बखारी गुफा, रामचुआ जलस्रोत।
21. राजनांदगांव जिले के पर्यटन स्थल –
चितवा डोंगरी-चितवा डोंगरी में प्रागैतिहासिक शैल चित्र है, जो कि ड्रैगन की आकृति की है। नवपाषाण कालीन स्थल शैल चित्र है। शैलचित्र की खोज सर्वप्रथम भगवान सिंह बघेल एवं रमेन्द्रनाथ मिश्र ने की थी। राजनांदगांव-छत्तीसगढ़ में प्रथम किसान माल (2010) की स्थापना राजनांदगांव में की गयी है। 27 नवंबर 1888, नागपुर से राजनांदगांव प्रथम रेल संचालन। 1892 में जे. के. मैकवेथ कंपनी द्वारा सी.पी. मिल्स की स्थापना की गई। इस समय नांदगांव रियासत के राजा बलराम दास थे। प्रदेश का प्रथम हॉकी एस्ट्रोटर्फ मैदान राजनांदगांव में स्थित है।
22. नारायणपुर जिले के पर्यटन स्थल –
छोटे डोंगर-छोटे डोंगर में लौह अयस्क पाए जाते हैं। यहां प्राचीन मंदिरों के भग्नावेष हैं। नारायणपुर-नारायणपुर में ष्स्वामी आत्मानंदष् द्वारा स्वामी रामकृष्ण मिशन स्थापित (1985) है। अबूझमाड़िया विकास अभिकरण का मुख्यालय है। प्रतिवर्ष मड़ई मेला लगता है जो विश्व चर्चित है। एशिया का दूसरा सबसे बड़ा काष्ठागार स्थित है जो वर्तमान में बंद है। जाटलूर नदी-मगरमच्छों का प्राकृतिक आवास स्थित है। खुसरेल घाटी-उच्च किस्म के सागौन वृक्ष एवं खुसरेल जलप्रपात स्थित है।
23. बीजापुर जिले के पर्यटन स्थल –
भोपालपट्टनम-1795 में मि. ब्लंट के आगमन के विरोध में भोपालपट्टनम का संघर्ष हुआ था। भद्रकाली मंदिर-बसंत पंचमी के दिन विशाल मेले का आयोजन किया जाता है।
24. दंतेवाड़ा जिले के पर्यटन स्थल –
बारसूर-इसका प्राचीन नाम चक्रकोट या भ्रमरकूट था। यह छिंदकनागवंशियों की प्रारंभिक राजधानी थी। यहाँ काले ग्रेनाइट से निर्मित नंदी बैल पाए जाते हैं। यहां निम्नलिखित मंदिर स्थित है -
1. मामा - भांजा मंदिर (गणेश व नरसिंहनाथ की प्रतिमा),
2. बत्तीसा मंदिर (बत्तीस स्तंभों से निर्मित मंदिर),
3. चंद्रादित्य मंदिर,
4. गणेश जी की विशाल मूर्ति,
5. प्राचीन चंद्रादित्य समुद्र नामक सरोवर बारसूर में स्थित है। दंतेश्वरी मंदिर-इसका निर्माण 14 वीं सदी में हुआ। निर्माणकर्ता-अन्नमदेव (काकतीयवंशी शासक) थे। यह मंदिर डंकिनी-शंखिनी नदी के संगम पर निर्मित है।
25. सुकमा जिले के पर्यटन स्थल –
कोंटा - यह छत्तीसगढ़ का दक्षिणतम छोर है। शबरी नदी पर कोंटा से लेकर कुनांवरम् (आन्ध्रप्रदेश) तक जल परिवहन की सुविधा है। रामाराम-इसे राम वनगमन पथ के रूप में विकसित किया जा रहा है। सुकमा-छत्तीसगढ़ का प्रथम साइंस पार्क की स्थापना किया गया है। छिंदगढ़ विकासखंड-छिंदगढ़ विकासखंड गोबर बोहारनी पर्व प्रसिद्ध है। नेतनार-शबरी नदी के किनारे शिव मंदिर स्थित है।
26. कोण्डागांव जिले के पर्यटन स्थल –
केशकाल घाटी-केशकाल छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा जल विभाजक पर्वत है। जिसके कारण महानदी का उद्गम दक्षिण में होने के बावजूद उसका प्रवाह उत्तर की ओर होता है। केशकाल का नामकरण केशलू नामक बहादुर व्यक्ति के याद में इसका नामकरण किया गया है जो शेर से लड़ते-लड़ते मारा गया था। केशकाल घाटी में कुल 12 मोड़ है। केशकाल घाटी को बस्तर के प्रवेश द्वार के नाम से जाना जाता है। इस घाटी पर तेलिन माता मंदिर स्थित है (तेलिन घाटी)। केशकाल घाटी महानदी व गोदावरी अपवाह तंत्र का जल विभाजक है।
27. कांकेर जिले के पर्यटन स्थल -
गढ़िया पहाड़-यह कांकेर जिले में स्थित है। 1800 ई. के पूर्व कांकेर रियासत के राजा धर्म देव ने राजधानी गढ़िया पहाड़ के ऊपर समतल मैदान पर स्थापित की थी किंतु कुछ समय के बाद पहाड़ी के नीचे कांकेर में राजधानी स्थानांतरित की गई। पर्वत के ऊपर एक तालाब है जो कभी भी नहीं सकता इसका एक भाग सोनई दूसरा भाग रूपई कहलाता है जो राजा के दोनों पुत्रियों के नाम पर रखा गया है।
28. बस्तर जिले के पर्यटन स्थल –
जगदलपुर-यह बस्तर जिले का जिला मुख्यालय है। यह इंद्रावती नदी के तट पर बसा है। जगदलपुर का प्राचीन नाम जगदुगुड़ा था। राजा ने राजधानी के लिए जगदु माहरा से जमीन खरीदी और अपनी राजधानी बनाई, बाद में इसे रूद्रदेव द्वारा सुव्यवस्थित ढंग से बसाया। जगदलपुर राजमहल परिसर में दंतेश्वरी मंदिर स्थापित है। एशिया का सबसे बड़ा इमली मण्डी जगदलपुर में है। छत्तीसगढ़ का एकमात्र वनपाल प्रशिक्षण विद्यालय स्थित है। हस्तशिल्प कॉम्प्लेक्स की स्थापना की जा रही है। जगदलपुर में काजू शोध केन्द्र स्थित है।
पर्यटन के विकास हेतु सुझाव-
1. पर्यटन के विकास को बढ़ावा देने के लिए किसी क्षेत्र विषेष में आवष्यक सुविधाओं को विकसित करना।
2. पर्यटन मार्गदर्षिका उपलब्ध कराना।
3. पर्यटन के जानकार गाईड की व्यवस्था कराना।
4. पर्यटन क्षेत्रों की पहचान कराना।
5. वित्तीय सहायता उपलब्ध करानां।
6. परिवहन की समुचित व्यवस्था कराना।
7. विदेषी पर्यटकों के रूकने, ठहरने एवं भोजन के लिए समुचित हॉटल, रिसोर्ट तथा तकनीकी सुविधा
उपलब्ध कराना।
8. विदेषी कार्यालयों का पुनरू द्वारा करना।
9. नये सूचनातंत्र एवं संचार के साधनों का विकास करना।
10.पर्यटन के विकास और तीव्र निवेष के लिए नये क्षेत्रों का सृजनकर अधिसूचित क्षेत्र में सम्मिलित करना तथा हस्तषिल्प, सांस्कृतिक विषिष्टताओं को बढ़ावा देना है।
11. स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सुविधाओं का विकास सकना।
12. स्थानीय विनिर्माण उद्योग को बढ़ावा देना।
13. पर्यटन और षिक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल करना।
14. प्राकृतिक पर्यटन स्थल, सामाजिक पर्यटन स्थल, किले/महल एवं इमारते।
15. राष्ट्रीय नीति बनाना। संग्रहालय, लोक प्रथाओं को चिन्हांकित करना।
16. जनचेतना को बढ़ाना।
17. अदृश्य प्राकृतिक स्थलों, जलस्रोत, मूर्तियों एवं दार्षनीय स्थलों को अजागर करना।
निष्कर्ष-
पर्यटन उद्योग सूचना तंत्र के विकास के कारण ही विकसित होते है। विभिन्न प्रकार की पत्र पत्रिकाओं, समाचार पत्र, चलचित्र, टेलीविजन, पर्यटन, एलबम, कम्प्यूटर इन्टरनेट प्रणालियों को विकसित करना जरूरी है। मानव भ्रमण के लिए प्राकृतिक एवं सामाजिक कारणों से आकर्षित होता है। अतः पर्यटको के आने पर उनके रहने-ठहरने की समुचित व्यवस्था हॉटल आदि हो। पर्यटन में अत्याधुनिक परिवहन के साधनों को बढ़ावा मिले, गाईड के परिवारों का लालन पालन हो जिसमें आर्थिक समृद्धि होगी। पर्यटन आज षिक्षा का मूल विषय है अतः शोध को बढ़ावा देना होगा। आज पर्यटन की ओर मानव आकर्षित हो रहा है इसलिए पर्यटन प्रबंधन में लोग अपना भविष्य बनाने लगे है। देश विदेश सभी जगह जहां पर्यटन स्थल विकसित है वहां रोजगार के साधन उपलब्ध हो जाते है। अतः स्थानीय प्रबंधन समितियों की स्थापना में पर्यटन उद्योगो को बढ़ावा मिल रहा है। अतः पर्यटन की संभावना बहुत अधिक है उनका भविष्य उज्जवल है बषर्ते समस्याओं का निराकरण उचित माध्यम से त्वरित हो। किसी स्थल की पहचान आज वहां का पर्यटन स्थल हो रहा है। लोग आध्यात्मिक रूप से भी स्वीकार करते हुए वहां जाना अपना सौभाग्य समझता है। अतः सभी आवष्यक सुविधाएँ स्थापित कर स्थानीय रूप से समस्याओं का निराकरण कर पर्यटन क्षेत्र को विकसित किया जा सकता है। प्लेस ऑन व्हील्स, रिवर कु्रमेंज का संचालन कर विषेषज्ञों की सहायता से पर्यटन का समुचित एवं लाभकारी प्रबंध करते हुए सकारात्मक जवाबदाही सुनिष्चित कर विकास किया जा सकता है। घरेलु पर्यटकों की सुविधाओं में बुनियादी सुधार करना राज्य सरकारों तथा सेवा कार्य में लगी संस्थाओं के सहयोग में योजनाबद्ध तरीके से पर्याप्त सुविधाओं के प्रबंध से पर्यटन स्थल विकसित होगा तथा देष के सकल घरेलू उत्पाद जी.डी.पी. मे महत्वपूर्ण योगदान है।
संदर्भ ग्रंथ सूची
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4. Website http:@@www-nationlageographic-com-
5. Website http:@@www-alternativegreece-gr-
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Received on 03.10.2023 Modified on 05.11.2023 Accepted on 22.11.2023 © A&V Publication all right reserved Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 2023; 11(4):253-259. DOI: 10.52711/2454-2687.2023.00043 |